त्रिभुवन सहकारी विश्वविद्यालय से संबद्धता के लिए निरीक्षण दल ने हिमकोफैड के प्रशिक्षण संस्थानों का किया निरीक्षण
त्रिभुवन सहकारी विश्वविद्यालय से संबद्धता की प्रक्रिया के अंतर्गत विश्वविद्यालय की प्रोफेसर माधवी मेहता एवं प्रो. अक्षय अग्रवाल ने दिनांक 8 से 10 अक्टूबर, 2026 तक हिमाचल प्रदेश राज्य सहकारी विकास संघ मर्यादित (हिमकोफैड) के विभिन्न प्रशिक्षण संस्थानों का दौरा कर वहां उपलब्ध शैक्षणिक एवं प्रशिक्षण सुविधाओं का निरीक्षण किया। इस दौरे का मुख्य उद्देश्य हिमकोफैड के डिप्लोमा पाठ्यक्रम की विश्वविद्यालय से संबद्धता के लिए निर्धारित मानकों के अनुरूप आवश्यक व्यवस्थाओं का जायजा लेना था। दिनांक 8 अक्टूबर, 2026 को निरीक्षण दल ने हिमाचल प्रदेश राज्य सहकारी प्रबंधन केंद्र, मशोबरा का दौरा किया। इस अवसर पर हिमकोफैड के चेयरमैन श्री विक्रम शर्मा डिक्की ने निरीक्षण दल का स्वागत किया। दल ने संस्थान के प्रशिक्षुओं एवं कर्मचारियों से बातचीत कर वहां संचालित सहकारी शिक्षा एवं प्रशिक्षण कार्यक्रमों की जानकारी प्राप्त की। इसके अतिरिक्त संस्थान के भोजनालय, पुस्तकालय एवं छात्रावास सहित उपलब्ध सुविधाओं का निरीक्षण भी किया गया। इस अवसर पर श्री अशोक शर्मा, सहायक सहकारी शिक्षा अधिकारी; श्री कमल स्वरूप धूली, प्रचार-प्रसार अधिकारी; श्री सुरेश कुमार, प्रधानाचार्य तथा श्री नरेश कुमार, व्याख्याता उपस्थित रहे। निरीक्षण के उपरांत प्रो. माधवी मेहता एवं प्रो. अक्षय अग्रवाल ने हिमकोफैड के चेयरमैन श्री विक्रम शर्मा डिक्की के साथ हिमाचल प्रदेश सरकार के सचिव (सहकारिता) श्री सुदेश मोक्टा (IAS) से भेंट की। बैठक के दौरान हिमकोफैड द्वारा संचालित प्रशिक्षण एवं शैक्षणिक कार्यक्रमों तथा डिप्लोमा पाठ्यक्रम को त्रिभुवन सहकारी विश्वविद्यालय से संबद्ध करवाने के लिए निर्धारित मानकों और आवश्यक प्रक्रियाओं पर विस्तारपूर्वक चर्चा की गई। सचिव (सहकारिता) ने हिमकोफैड को विश्वविद्यालय से संबद्धता प्राप्त करने की प्रक्रिया में पूर्ण सहयोग प्रदान करने के निर्देश दिए। इसके पश्चात निरीक्षण दल ने हिमकोफैड मुख्यालय का भी निरीक्षण किया। इस दौरान संबद्धता से संबंधित आवश्यक अभिलेखों एवं दस्तावेजों की जांच की गई। हिमकोफैड के अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने निरीक्षण दल को आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध करवाते हुए पूर्ण सहयोग प्रदान किया। दिनांक 9 अक्टूबर, 2026 को निरीक्षण दल ने हिमकोफैड के चेयरमैन श्री विक्रम शर्मा डिक्की तथा सचिव (सहकारिता) श्री सुदेश मोक्टा (IAS) के साथ ऊना जिला के पंजावर स्थित निर्माणाधीन आधुनिक प्रशिक्षण केंद्र का दौरा किया। इस केंद्र का नाम मियां हीरा सिंह ठाकुर के नाम पर रखा गया है। दौरे के दौरान चेयरमैन श्री विक्रम शर्मा डिक्की ने सुझाव दिया कि भविष्य में इस केंद्र में सहकारिता के क्षेत्र में उच्चस्तरीय एवं दीर्घकालीन पाठ्यक्रम संचालित किए जा सकते हैं। इनमें एक वर्षीय उच्चस्तरीय डिप्लोमा पाठ्यक्रम तथा एमबीए जैसे व्यावसायिक पाठ्यक्रम शुरू करने की संभावनाओं पर विचार किया जा सकता है। इससे सहकारी क्षेत्र के लिए प्रशिक्षित एवं कुशल मानव संसाधन तैयार करने में सहायता मिलेगी। इस अवसर पर सचिव (सहकारिता) ने लोक निर्माण विभाग (PWD) को प्रशिक्षण केंद्र के निर्माण कार्य को शीघ्र पूरा करने के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश प्रदान किए। दौरे के दौरान सहकारिता विभाग के उप पंजीयक (लेखापरीक्षा) श्री प्रत्युष चौहान तथा सहायक पंजीयक, सहकारी सभाएं, ऊना श्री राजेश कौशल भी उपस्थित रहे। दिनांक 10 अक्टूबर, 2026 को निरीक्षण दल ने हिमाचल प्रदेश राज्य सहकारी प्रबंधन केंद्र, गरली का दौरा किया। यहां हिमकोफैड के चेयरमैन श्री विक्रम शर्मा डिक्की ने निरीक्षण दल का स्वागत किया। संस्थान के प्रधानाचार्य श्री बलविंदर सिंह ने निरीक्षण समिति के समक्ष संबद्धता से संबंधित आवश्यक अभिलेख एवं दस्तावेज प्रस्तुत किए। निरीक्षण दल ने संस्थान की शैक्षणिक व्यवस्था, प्रशिक्षण गतिविधियों तथा उपलब्ध सुविधाओं एवं अभिलेखों का अवलोकन किया। निरीक्षण के दौरान संस्थान में संचालित शिक्षा एवं प्रशिक्षण कार्यक्रमों की जानकारी भी प्राप्त की गई। निरीक्षण दल के सदस्यों ने संस्थान की शैक्षणिक एवं प्रशिक्षण व्यवस्थाओं की सराहना करते हुए भविष्य में त्रिभुवन सहकारी विश्वविद्यालय से संबद्धता की दिशा में सहयोग का आश्वासन दिया। हिमकोफैड द्वारा प्रदेश में सहकारी शिक्षा, प्रशिक्षण एवं प्रचार-प्रसार के माध्यम से सहकारी आंदोलन को सशक्त बनाने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। त्रिभुवन सहकारी विश्वविद्यालय से संबद्धता प्राप्त होने से सहकारी क्षेत्र में व्यवस्थित, गुणवत्तापूर्ण एवं व्यावसायिक शिक्षा को बढ़ावा देने की दिशा में नए अवसर उपलब्ध हो सकते हैं। हिमकोफैड का लक्ष्य अपने प्रशिक्षण संस्थानों को आधुनिक शैक्षणिक सुविधाओं से सुसज्जित करना तथा सहकारी संस्थाओं के पदाधिकारियों, कर्मचारियों एवं युवाओं को सहकारिता के क्षेत्र में आवश्यक ज्ञान, कौशल और व्यावसायिक दक्षता प्रदान करना है। इस दिशा में विश्वविद्यालय से संबद्धता की प्रक्रिया प्रदेश के सहकारी शिक्षा एवं प्रशिक्षण तंत्र को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।